लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में फायर सेफ्टी को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। इसी क्रम में गोरखपुर में प्रशासन और फायर विभाग की संयुक्त टीम ने लगातार दूसरे दिन कोचिंग संस्थानों की गहन जांच की। जांच के दौरान कई संस्थान सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद उन्हें तीन दिन के भीतर कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है।
फायर सेफ्टी और एमरजेंसी एग्जिट की हुई जांच
बुधवार को अपर जिलाधिकारी (नगर) गजेंद्र कुमार और मुख्य अग्निशमन अधिकारी संतोष कुमार राय की अगुवाई में टीम ने कैंट थाना क्षेत्र स्थित शाही मार्केट और प्रताप मार्केट में संचालित कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया, जिनमें एमरजेंसी एग्जिट की उपलब्धता, फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति और कर्मचारियों को इन उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण शामिल था।
एक दर्जन से अधिक कोचिंग सेंटर मिले मानकों से दूर
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि एक दर्जन से अधिक कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। अधिकांश संस्थानों में आपातकालीन निकास मार्ग (एमरजेंसी एग्जिट) नहीं मिले। वहीं कई जगहों पर फायर सेफ्टी उपकरण या तो खराब पाए गए या उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं थी।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कर्मचारियों को अग्निशमन उपकरणों के संचालन का उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थानों को लिखित नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया है।
तीन दिन में सुधार नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई
प्रशासन ने कोचिंग संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर एमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था शुरू करें, फायर सेफ्टी उपकरणों को दुरुस्त कराएं और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाएं। अधिकारियों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकना और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बंद मिले संस्थानों की भी होगी जांच
अपर जिलाधिकारी नगर गजेंद्र कुमार ने बताया कि जो कोचिंग संस्थान जांच के दौरान बंद मिले हैं या डर के कारण ताला लगाकर संचालित नहीं हो रहे हैं, उनकी भी जांच कराई जाएगी। ऐसे संस्थानों को खोलवाकर सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है तो उसे नोटिस जारी कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही भविष्य में भी नियमित अभियान चलाकर निरीक्षण किया जाएगा और लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए भी दिए गए निर्देश
मुख्य अग्निशमन अधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि जांच के दौरान कई संस्थानों में बिजली के पुराने और जर्जर तार भी पाए गए हैं। संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे विद्युत लोड के अनुरूप वायरिंग को दुरुस्त कराएं और खराब तारों को बदलवाएं, ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि अधिकांश संस्थानों में एमरजेंसी एग्जिट और फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली है। इसलिए सभी को लिखित नोटिस देकर तीन दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी।














