मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव तेज होने के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। हालात को गंभीर मानते हुए भारत सरकार ने दोनों देशों से तत्काल तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी करते हुए फिलहाल ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है।
भारत ने जताई चिंता, बातचीत से समाधान पर दिया जोर
विदेश मंत्रालय ने कहा कि 8 अप्रैल को हुए अस्थायी सीजफायर के बाद यह दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर पहला सीधा हमला है। मंत्रालय के अनुसार पिछले 100 दिनों से अधिक समय से जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा है।
भारत ने सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। सरकार का मानना है कि बढ़ता सैन्य तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।
भारतीय नागरिकों के लिए जारी हुई नई एडवाइजरी
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों को फिलहाल ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा जो भारतीय नागरिक वर्तमान में ईरान में मौजूद हैं, उन्हें उपलब्ध साधनों का उपयोग कर जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। इससे पहले 7 अप्रैल को भी भारत सरकार ने अपने नागरिकों से 48 घंटे तक सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा था।
इजरायल ने ईरान में किए हवाई हमले
रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (8 जून 2026) को इजरायल ने तेहरान की ओर से हुए मिसाइल हमले के जवाब में मध्य और पश्चिमी ईरान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता को और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हालात को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी समाप्त नहीं करता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
अब तक 1,800 भारतीय लौट चुके हैं स्वदेश
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल थे। अब तक लगभग 1,800 भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं।
सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।
लेबनान पर हमलों के बाद बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान पर इजरायल के लगातार हमलों से नाराज होकर रविवार (7 जून 2026) को ईरान ने इजरायल पर हमला किया। इससे पहले इजरायल ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हवाई हमले किए थे।
इजरायल का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह लड़ाकों द्वारा की गई गोलीबारी के जवाब में की गई। वहीं ईरान लगातार यह मांग कर रहा है कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए लेबनान में युद्धविराम आवश्यक है।















