मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने गुरुवार (23 अप्रैल 2026) को नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से तुरंत सतर्क रहने और हालात बिगड़ने से पहले सुरक्षित बाहर निकलने की अपील की है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है।
भारतीय दूतावास की सख्त एडवाइजरी
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भारतीय नागरिक किसी भी माध्यम—चाहे हवाई मार्ग हो या जमीनी—से ईरान की यात्रा न करें। एडवाइजरी में कहा गया है, ‘भारतीय नागरिक हवाई या जमीन किसी भी रास्ते ईरान की यात्रा नहीं करें. ईरान की यात्रा करना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है.’
इसके साथ ही दूतावास ने यह भी बताया कि क्षेत्रीय तनाव के कारण एयरस्पेस पर कई प्रतिबंध लागू हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन प्रभावित हो रहा है। दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीयों को निर्देश दिया है, ‘जो भारतीय नागरिक वर्तमान में ईरान में हैं, वे तुरंत देश छोड़ दें. नागरिक दूतावास के संपर्क में बने रहें.’
ट्रंप के सख्त आदेश से बढ़ी टेंशन
यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा खतरे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि संदिग्ध गतिविधियों में शामिल किसी भी नाव को तुरंत नष्ट कर दिया जाए। इसके साथ ही माइन-स्वीपिंग ऑपरेशन को तेज करने के आदेश भी दिए गए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा, ‘मैंने यूनाइटेड स्टेट्स नेवी को आदेश दिया है कि वह किसी भी नाव को, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, जो होर्मुज स्ट्रेट के पानी में बारूदी सुरंगें बिछा रही हो, उसे गोली मारकर नष्ट कर दे. इसमें जरा भी हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी माइन स्वीपर्स इस समय क्षेत्र को साफ करने में जुटे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के अंदरूनी हालात पर भी टिप्पणी की और नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान को यह समझने में बहुत मुश्किल हो रही है कि उसका असली नेता कौन है. उन्हें खुद भी साफ नहीं पता. वहां ‘हार्डलाइनर’ (कड़े रुख वाले) और ‘मॉडरेट’ (नरम रुख वाले) गुटों के बीच भारी अंदरूनी खींचतान चल रही है. हार्डलाइनर युद्ध के मैदान में बुरी तरह से हार रहे हैं, जबकि मॉडरेट (जो वैसे बहुत नरम भी नहीं हैं) अब ज्यादा सम्मान पा रहे हैं.’
इन घटनाक्रमों के चलते मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।














