भारत सरकार ने भारतीय सेना के वर्तमान वाइस चीफ Dhirej Seth को देश का अगला थलसेना प्रमुख नियुक्त करने का फैसला किया है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ 30 जून को सेना की कमान संभालेंगे और मौजूदा सेना प्रमुख Upendra Dwivedi का स्थान लेंगे, जो अपने कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
उनकी नियुक्ति कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि लगभग तीन दशक बाद किसी आर्मर्ड कोर (टैंक अधिकारी) को भारतीय सेना की सर्वोच्च जिम्मेदारी सौंपी गई है।
30 साल बाद टैंक अधिकारी बने सेना प्रमुख
भारतीय सेना के इतिहास में अधिकांश थलसेना प्रमुख इंफेंट्री या आर्टिलरी पृष्ठभूमि से आते रहे हैं। ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
इससे पहले वर्ष 1997 में Shankar Roy Chowdhury आर्मर्ड कोर से आने वाले अंतिम अधिकारी थे, जिन्होंने सेना प्रमुख का पद संभाला था। अब करीब 30 वर्ष बाद एक बार फिर टैंक अधिकारी को सेना की कमान मिली है।
स्ट्राइक कोर और सीमावर्ती क्षेत्रों का लंबा अनुभव
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना के सबसे अनुभवी कमांडरों में गिना जाता है। वे भोपाल स्थित सुदर्शन चक्र कोर के कमांडर रह चुके हैं, जिसे सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर में शामिल किया जाता है।
इसके अलावा उन्होंने दक्षिणी कमान और पश्चिम-दक्षिणी कमान में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। ये सैन्य संरचनाएं पंजाब के बठिंडा से लेकर गुजरात के कच्छ तक फैली पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं।
उनका लंबा अनुभव ऑपरेशनल रणनीति, युद्धक तैयारियों और सीमावर्ती सुरक्षा से जुड़ा रहा है।
सेना से जुड़ा रहा पारिवारिक इतिहास
धीरज सेठ का सेना से जुड़ाव पारिवारिक स्तर पर भी रहा है। उनके पिता K M Seth भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद तक पहुंचे थे और वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, धीरज सेठ ने National Defence Academy से प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्ष 1986 में भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल किया।
राजस्थान से कश्मीर तक संभाली अहम जिम्मेदारियां
करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। मध्य करियर के दौरान उन्होंने राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी एक काउंटर-इनसर्जेंसी फोर्स का नेतृत्व भी किया। इससे उन्हें पारंपरिक युद्ध और आंतरिक सुरक्षा, दोनों क्षेत्रों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
पेरिस से किया कमांड एंड स्टाफ कोर्स
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ केवल सैन्य संचालन में ही नहीं, बल्कि रणनीतिक अध्ययन के क्षेत्र में भी मजबूत पृष्ठभूमि रखते हैं।
उन्होंने National Defence College से स्ट्रेटेजिक स्टडीज का अध्ययन किया है। साथ ही उन्होंने फ्रांस की राजधानी Paris में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है।
यह अंतरराष्ट्रीय सैन्य प्रशिक्षण उन्हें आधुनिक युद्ध रणनीतियों और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों की गहरी समझ प्रदान करता है।
सेना के आधुनिकीकरण में निभाई बड़ी भूमिका
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों में भी कार्य किया है।
उन्हें भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, भविष्य की युद्ध क्षमताओं के विकास और दीर्घकालिक सैन्य संरचना तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने नई तकनीकों को सेना की जरूरतों के अनुरूप अपनाने और भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के लिए सेना को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है।
नई चुनौतियों के दौर में संभालेंगे सेना की कमान
ऐसे समय में जब भारतीय सेना आधुनिक तकनीक, सीमा सुरक्षा और भविष्य के युद्ध स्वरूपों को ध्यान में रखते हुए तेजी से बदलाव कर रही है, धीरज सेठ का अनुभव सेना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उनकी नियुक्ति को एक ऐसे सैन्य नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है जो पारंपरिक युद्ध कौशल के साथ-साथ तकनीकी आधुनिकीकरण और रणनीतिक बदलावों को भी आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है।












