उत्तर प्रदेश के लखनऊ और कानपुर को जोड़ने के लिए करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए 64 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे पर कुछ ही दिनों में कई जगह गड्ढे, दरारें और सड़क धंसने की शिकायतें सामने आई हैं।
एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही परियोजना से जुड़े कई अधिकारियों को हटाया गया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
NHAI ने निर्माण कंपनी और अधिकारियों पर लिया एक्शन
एक्सप्रेसवे में सामने आई खामियों के बाद NHAI ने निर्माण करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके अलावा परियोजना प्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया है।
लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर अब पूरे मामले की जांच भी कराई जा रही है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर बीजेपी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, “ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा, कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है ये भी हास्यास्पद है. 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?”
उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए लिखा, “सवाल ये भी है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ योजना में ही रहेगा या कभी बनेगा भी या काग़ज़ों में बनकर उसका ‘हिस्सा-बाँट’ हो चुका है. भाजपा राज में हुआ हर निर्माण चलता कम है धँसता, ढहता, गिरता ज़्यादा है.”
24 दिनों में 80 से ज्यादा गड्ढे, कई जगह दिखीं दरारें
उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एक्सप्रेसवे पर सड़क की स्थिति बिगड़ने लगी। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर सड़क के किनारे लगाए गए पैच हाथ से उखड़ते दिखाई दिए। कुछ जगह डिवाइडर क्षतिग्रस्त मिले, जबकि कई हिस्सों में दरारें और गड्ढे भी नजर आए।
रिपोर्ट के अनुसार, पूरे एक्सप्रेसवे पर 80 से अधिक गड्ढे चिन्हित किए गए हैं। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में कर्मचारी मरम्मत कार्य में जुटे रहे। बारिश से बचाव के लिए सड़क के हिस्सों को पन्नी से ढका गया और नमी सुखाने के लिए पंखों का भी उपयोग किया गया। कुछ स्थानों पर सड़क धंसी हुई भी दिखाई दी।
मरम्मत तक टोल वसूली रहेगी बंद
NHAI ने 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे में धंसाव की शिकायतों के बाद PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को नोटिस जारी किया। कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया है और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया गया है।
इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर तीन वर्ष तक डिबारमेंट की कार्रवाई की गई है। एक्सप्रेसवे की मरम्मत का लगभग तीन करोड़ रुपये का पूरा खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी। साथ ही मरम्मत कार्य पूरा होने तक टोल वसूली पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है।
IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच
पूरे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की जांच अब लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से कराई जाएगी। इसके अलावा IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम भी निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करेगी। NHAI के मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।














