सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान को विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने शुक्रवार को कड़ा संदेश दिया। उनका यह बयान पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस यानी 14 अगस्त को आया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सिंधु नदी के पानी की हर बूंद को लेकर चिंतित हैं और इसे रेड लाइन बताते हैं, लेकिन भारत का संदेश बिल्कुल अलग है।
एमजे अकबर ने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में बहे भारतीय खून की हर बूंद की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान को इसका जवाब देना होगा। उनके मुताबिक, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।
‘पाकिस्तान की पूरी सच्चाई वहां के एक नेता ने उजागर की’
एमजे अकबर ने पाकिस्तान की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की पूरी सच्चाई एक बड़े पाकिस्तानी नेता और जमीयत के चीफ मौलाना फजलुर रहमान ने उजागर की है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के बारे में पूरी सच्चाई एक बड़े पाकिस्तान नेता और जमीयत के चीफ मौलाना फजलुर रहमान ने उजागर की है. उन्होंने पाकिस्तान की सरकार, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (पाकिस्तान के असली प्रमुख) से कहा है कि कुछ बोलने से पहले वे कुल्ला कर लें. उनका इशारा है कि झूठ बोलने से उनकी आवाजें अपवित्र हो गई हैं।’
इसके अलावा विदेश राज्य मंत्री ने बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर भी पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के बारे में जो सच्चाई उन्होंने खुद उजागर की है, वह यह सच है कि आज बलूचिस्तान का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इस्लामाबाद के कंट्रोल और शासन के बाहर है. बलूचिस्तान का 80 प्रतिशत स्वतंत्र है. यह आजाद है. यह निश्चित रूप से पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर है।’
स्वतंत्रता दिवस पर Pakistan के बिखरने का दावा
एमजे अकबर ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस का जिक्र करते हुए उसकी आंतरिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान अपने स्वतंत्रता दिवस पर बिखर रहा है. यह वैसा ही बन गया है, जैसा मैंने अपनी किताब में जेली स्टेट के तौर पर बताया था. जो न तो स्थिर रहेगा. न ही पूरी तरह खत्म होगा. पाकिस्तान की सच्चाई वे लोग जानते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में पाकिस्तान की सेना की बर्बरता का सामना किया है. यह सच्चाई पाकिस्तानी जनता भी जानती है. पाकिस्तान बर्बादी की कगार पर है।’
एमजे अकबर के इस बयान में एक तरफ सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख को स्पष्ट करने की कोशिश की गई, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान में आतंकवाद, बलूचिस्तान और सेना की भूमिका को लेकर भी तीखी टिप्पणी की गई है। खास तौर पर ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’ वाला उनका बयान सिंधु जल संधि और आतंकवाद के मुद्दे को सीधे जोड़ता है।















