प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूर में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र ‘विवेक स्मारक’ का उद्घाटन करते हुए देश के युवाओं की भूमिका को भारत के विकास की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय युवा स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इनोवेशन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और संकल्प देश को ग्लोबल इनोवेशन लीडर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का युवा नए विचारों और तकनीक के दम पर भारत की प्रगति को नई गति दे रहा है।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बनाकर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उस समय भारत गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था और यहां के युवा भी स्वतंत्र रूप से अपनी क्षमता का विकास नहीं कर पा रहे थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद भारत के युवाओं ने लंबा सफर तय किया है। उन्होंने कहा कि जो युवा कभी गुलामी की जंजीरों में बंधा था, वही आज दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुका है और इसका सबसे बड़ा श्रेय देश के युवाओं को जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय युवाओं ने AI, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में अंतरिक्ष में पहुंचे एक निजी रॉकेट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भी देश के युवाओं की प्रतिभा और नवाचार का परिणाम है।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम से पहले वह उस भवन में भी गए थे, जहां स्वामी विवेकानंद ने कुछ समय बिताया था। उन्होंने कहा कि आज उसी विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “व्यक्ति से विभूति का निर्माण एक दिन में नहीं होता.” इसके लिए वर्षों का तप, समर्पण और अनगिनत योगदान आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि किसी महान व्यक्तित्व को उसके तप और संघर्ष के दौर में पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी यात्रा में रामकृष्ण मिशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि करीब तीन महीने पहले वह हावड़ा स्थित बेलूर मठ गए थे, जहां उन्होंने मठ के गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।















