प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुए हाई-प्रोफाइल विवाद पर अब अफसरों ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रयागराज मंडल की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ किया कि इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की तरफ से कोई चूक नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य ने अपने स्नान कार्यक्रम की कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। उन्होंने एक दिन पहले वाहनों की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से साफ मना कर दिया था। इसके बावजूद वे इमरजेंसी त्रिवेणी पीपा पुल से गाड़ी और सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे और बिना इजाजत बैरिकेडिंग तोड़ दी।
‘पालकी से उतरने को तैयार नहीं थे शंकराचार्य’
प्रशासन का कहना है कि संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और दबाव बहुत ज्यादा था, लेकिन इसके बावजूद वहां भी बैरियर तोड़ा गया। अधिकारियों ने शंकराचार्य से कई बार अनुरोध किया कि भीड़ को देखते हुए वे पालकी से उतर जाएं और पैदल कुछ सीमित लोगों के साथ जाकर स्नान कर लें, लेकिन उन्होंने पालकी से उतरने से इनकार कर दिया और वापस चले गए। कमिश्नर ने शंकराचार्य द्वारा लगाए गए ‘हत्या की साजिश’ के आरोपों का सख्ती से खंडन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का काम सिर्फ व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना है, किसी को गंगा स्नान से रोकना नहीं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और 4 करोड़ की भीड़
मेला अधिकारी आईएएस ऋषि राज ने बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, वह प्रयागराज के लिए ऐतिहासिक दिन था और संगम में 4 करोड़ 52 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट के 2022 के स्पष्ट आदेश के अनुसार शंकराचार्य को किसी प्रकार का विशेष प्रोटोकॉल नहीं दिया जा सकता. यदि मेला प्रशासन ऐसा करता, तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती.” डीएम मनीष कुमार वर्मा ने भी कोर्ट के आदेश का ऑपरेटिव हिस्सा पढ़कर सुनाया और कहा कि नियमों का पालन करना हर सरकारी सेवक की जिम्मेदारी है।
एक व्यक्ति के लिए करोड़ों की जान खतरे में नहीं डाल सकते
पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए पूरी कोशिश की. बार-बार अनुरोध के बावजूद शंकराचार्य पालकी से उतरकर पैदल स्नान के लिए नहीं गए.” पुलिस कमिश्नर ने आगे कहा कि “एक व्यक्ति के कारण करोड़ों लोगों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती थी, यही कारण था कि उन्हें रोका गया.” प्रशासन ने यह भी जानकारी दी है कि शंकराचार्य की जिद के कारण वापसी मार्ग करीब तीन घंटे तक बाधित रहा, जिसके लिए अब साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।












