सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर की जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। इस मामले में चीफ जस्टिस ने युवा छात्रों के भविष्य और उनके अभिभावकों की चिंताओं का हवाला देते हुए अदालत के पहले के फैसले का बचाव किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि पुलिस को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने देना चाहिए और जांच में इस तरह का न्यायिक हस्तक्षेप कानून-व्यवस्था पर गलत असर डाल सकता है।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को नहीं मिली राहत: CJI
चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि एफआईआर रद्द करने का फैसला लेते समय युवा छात्रों के सामने पड़े लंबे जीवन और उनके माता-पिता के बारे में विचार किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को कोई राहत नहीं दी है।
सीजेआई ने यह भी बताया कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया था। अदालत के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य युवा छात्रों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना था।
‘हम नहीं चाहते उन्हें अदालत में आना पड़े’
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, ”आप कहते हैं कि हमें अनुच्छेद 142 लागू नहीं करना चाहिए था और एफआईआर रद्द नहीं करनी चाहिए थी. आप समझिए ये युवा छात्र हैं. हमें उनके माता-पिता, उनके भविष्य का ध्यान रखना है. हम नहीं चाहते कि उन्हें अदालत में आना पड़े.”
यह सुनवाई एल रामनाथन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता रामनाथन ने तर्क दिया कि पुलिस के कामकाज में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और उसे कानून के अनुसार अपना काम करने देना चाहिए।
NEET पेपर लीक के विरोध में हुआ था प्रदर्शन
मामले की पृष्ठभूमि में नीट पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन का जिक्र है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ आंदोलन शुरू किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कथित हिंसा के आरोपों में कई एफआईआर दर्ज की थीं।
इन्हीं एफआईआर की जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पुलिस को मामले की जांच करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने वाली है। प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं।
प्रदर्शन के मद्देनजर कई मेट्रो स्टेशनों को भी बंद किए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में राजधानी में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।















