उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम के साथ काम करने वाले छह सचिवों की नई टीम नियुक्त कर दी है। पार्टी के इस फैसले को आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव संगठन में नई कार्यशैली और नेतृत्व की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
यूपी कांग्रेस में छह नए सचिवों की नियुक्ति
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निर्देश और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल के आदेश पर तत्काल प्रभाव से नई नियुक्तियों की घोषणा की गई। अब ये सभी नए सचिव उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम के साथ संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
नई टीम में शामिल पदाधिकारी हैं:
- अभिषेक दत्त
- कुणाल चौधरी
- जगदीश चंद्र जांगिड़
- संजीव आर्य
- वरुण चौधरी
- अब्दुल हन्नान
इन नियुक्तियों के साथ कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सामाजिक न्याय के समीकरण पर दिया गया जोर
पार्टी ने नई टीम के गठन में सामाजिक न्याय और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है। संगठन में अलग-अलग सामाजिक समूहों को शामिल कर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
साथ ही कांग्रेस ने उन नेताओं के योगदान की भी सराहना की है, जो अब तक सचिव के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा रहे थे। इनमें धीरज गुर्जर, नीलांशु चतुर्वेदी, राजेश तिवारी, सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम शामिल हैं।
2027 विधानसभा चुनाव पर कांग्रेस का पूरा फोकस
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव कर रही है। इसके साथ ही निष्क्रिय और पुराने पदाधिकारियों की जगह नई टीम को जिम्मेदारी देकर संगठन को अधिक सक्रिय बनाने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का दावा है कि इस बदलाव को राहुल गांधी की सामाजिक न्याय आधारित राजनीति और संगठनात्मक रणनीति के अनुरूप देखा जा रहा है। हालांकि, यह विश्लेषकों का आकलन है और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसे इस रूप में प्रस्तुत नहीं किया है।
लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन को संविधान और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर मिले समर्थन को कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी उत्तर प्रदेश में अधिक आक्रामक चुनावी तैयारी करती दिखाई दे रही है।














