वाराणसी में दो दिनों तक गंगा के जलस्तर में गिरावट के बाद अब एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार रात से गंगा का पानी करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है।
पिछले दो दिनों में जलस्तर कम होने के बाद तटवर्ती इलाकों के लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही गंगा घाटों पर जनजीवन सामान्य हो जाएगा। लेकिन बुधवार रात से पानी बढ़ने के कारण एक बार फिर स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर बुधवार को वाराणसी में करीब आधे घंटे हुई बारिश ने भी शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। कई कॉलोनियों और गलियों के साथ मुख्य सड़कों पर भी पानी जमा हो गया।
69.26 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार रात 10 बजे तक वाराणसी में गंगा का जलस्तर 69.26 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद भी पानी के बढ़ने का सिलसिला जारी है और जलस्तर करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से ऊपर जा रहा है।
बीते दिनों पानी कम होने से तटवर्ती इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली थी और घाटों पर सामान्य गतिविधियां जल्द बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही थी। अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से इन इलाकों में परेशानी बढ़ने की आशंका है।
वरुणा नदी के किनारे फिर बन सकते हैं बाढ़ जैसे हालात
गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर वरुणा तटवर्ती क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। पिछले दिनों वरुणा नदी के आसपास बाढ़ जैसी स्थिति देखने को मिली थी। उस समय गंगा का पानी चेतावनी बिंदु के ऊपर पहुंच गया था। अब गंगा के जलस्तर में फिर वृद्धि होने के कारण वरुणा नदी में भी पानी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अगर जलस्तर में इसी तरह लगातार बढ़ोतरी होती रही तो वरुणा के आसपास दोबारा बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। ऐसे में अगले 24 से 48 घंटे काशी के गंगा और वरुणा तटवर्ती इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
बारिश के बाद शहर में जलभराव ने बढ़ाई परेशानी
बुधवार को वाराणसी में करीब आधे घंटे हुई बारिश के बाद कई कॉलोनी और गलियां पानी में डूबी नजर आईं। मुख्य सड़कों पर भी जलभराव होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। इस दौरान नगर निगम के कर्मचारियों और वाराणसी पुलिस के जवानों ने लोगों की मदद के लिए सक्रियता दिखाई।
हालांकि, बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में सामने आए जलभराव ने नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था और उससे जुड़े दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने और बारिश के कारण शहरवासियों के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है।
13 करोड़ की ड्रेनेज परियोजना से स्थायी समाधान की तैयारी
जलभराव की समस्या को लेकर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि नव विस्तारित क्षेत्र होने की वजह से फिलहाल वहां पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसी कारण बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
नगर आयुक्त के मुताबिक इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित मार्गों पर करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेनेज परियोजना तैयार की गई है। इसके लिए 8 सितंबर को टेंडर भी आमंत्रित किया गया है और जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। तत्काल राहत के लिए पंपिंग और पैचवर्क का काम 24 घंटे जारी रहने की बात भी कही गई है।














