मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए इंसेफेलाइटिस को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। अब इंसेफेलाइटिस समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी तारामंडल स्थित सेठ बद्री प्रसाद जायसवाल मेमोरियल हॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने रक्तदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उनके अनुसार, रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है।
IMA गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का हुआ लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएमए सिर्फ प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था नहीं है। गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर की शुरुआत करके आईएमए ने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए की ओर से निशुल्क ओपीडी शुरू की गई थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए जमीन की मांग की तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इसी भूखंड का बेहतर इस्तेमाल करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है। यह सेंटर पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा। गोरखपुर में आईएमए से 1400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हुए हैं।
कभी एक बेड पर भर्ती होते थे चार-चार मरीज
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की पुरानी स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था और हालात ऐसे थे कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल पर पंखे, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक का अभाव था। योगी ने कहा कि नौ वर्ष पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है। इसके अलावा महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है और दो एम्स भी संचालित हैं।
योगी ने बताया कि एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं, जबकि पीजी की सीटों में भी दोगुनी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।
माफिया से लेकर मेडिकल कॉलेज तक का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। गोरखपुर में डॉक्टरों के अपहरण, रंगदारी मांगने, धमकी भरे फोन और चेंबर में घुसकर मारपीट की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था।
योगी ने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य से बन रही है।
गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले अस्पताल को 10 बेड से शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया।
उन्होंने कहा कि इस चिकित्सालय ने यह दिखाया कि चैरिटी के जरिए भी अस्पताल और ब्लड बैंक सफलतापूर्वक संचालित किए जा सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए पहले लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है, जबकि एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम चल रहा है।
स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोगों से अपील
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रक्त की मांग के मुताबिक आपूर्ति नहीं हो पाती है। उन्होंने चिकित्सकों से लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।
लोकार्पण से पहले मुख्यमंत्री योगी ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया। उन्होंने चिकित्सकों से मशीनों के संचालन, रक्त संग्रह, जांच और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद शिलापट्ट का अनावरण कर ब्लड सेंटर का विधिवत लोकार्पण किया।
निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर भी मुख्यमंत्री की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और उसे स्नेह व आशीर्वाद दिया।














