लखनऊ। हैदर मिर्ज़ा रोड, गोलागंज स्थित सफिया क्लीनिक एंड नर्सिंग होम को लेकर कई गंभीर आरोप और शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अस्पताल की OPD बेसमेंट में संचालित हो रही है, जहां रोजाना करीब 150 मरीज देखे जाते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बेसमेंट में OPD संचालित होने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, अस्पताल की OPD बेसमेंट में चल रही है। आरोप है कि भवन में मरीजों के आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता है, जो आपातकालीन स्थिति में गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। शिकायतकर्ता ने अग्नि सुरक्षा को लेकर प्रशासन से जांच की मांग की है।
भवन के नक्शे और निर्माण को लेकर सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरी बिल्डिंग का लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकती है।
डॉक्टर की योग्यता को लेकर भी शिकायत
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डॉ. सफिया स्वयं मरीजों को देखती हैं, जबकि उनके पास चिकित्सा संबंधी आवश्यक डिग्री नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में उनकी बेटी की डिग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह मामला सही पाया जाता है तो संबंधित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमानुसार जांच की आवश्यकता होगी।
सड़क पर खड़ी होती हैं गाड़ियां, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाजाही पर सवाल
शिकायत में अस्पताल में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। दावा है कि करीब 10 फीट चौड़ी सड़क पर मरीजों और अस्पताल आने वाले लोगों की गाड़ियां खड़ी रहती हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
अस्पताल के ऊपर आवासीय इस्तेमाल का भी आरोप
शिकायत के अनुसार, अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर भी लोग रहते हैं। शिकायतकर्ता ने भवन के आवासीय और व्यावसायिक उपयोग तथा अलग-अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग से जुड़े नियमों की जांच की मांग की है।
प्रशासन से जांच की मांग
इन शिकायतों के मद्देनजर LDA, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग से अस्पताल के नक्शे, भवन उपयोग, ओपीडी संचालन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकास, पार्किंग और चिकित्सकीय पंजीकरण की जांच किए जाने की मांग की गई है। संबंधित विभागों की जांच और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।















