उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह निर्णय तब लिया गया जब उपभोक्ताओं के बीच लगातार विरोध और सवाल उठ रहे थे।
तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट तक इंतजार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 12 अप्रैल को गठित तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने तक किसी भी तरह का मीटर बदलाव नहीं किया जाएगा। पावर कॉर्पोरेशन अध्यक्ष की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, फिलहाल स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन पर रोक रहेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
विरोध के बीच सरकार ने लिया यू-टर्न
प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार विरोध बढ़ रहा था। कई जिलों में उपभोक्ताओं ने ज्यादा बिजली बिल आने और मीटर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। इसी बढ़ते असंतोष को देखते हुए सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
नए कनेक्शन में जारी रहेगा स्मार्ट मीटर
हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जाएंगे। पहले से चल रही योजना के तहत प्रदेश में करीब 3.5 करोड़ मीटर बदलने का लक्ष्य रखा गया था, जिस पर काम भी शुरू हो चुका था।
78 लाख मीटर पहले ही लगाए जा चुके
अब तक राज्य में लगभग 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। लेकिन इन मीटरों को लेकर यह आरोप भी सामने आए कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना पुराने मीटर हटाकर प्रीपेड मीटर लगाए गए। इसके साथ ही बढ़े हुए बिलों को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखी गई।
27 हजार करोड़ की योजना पर अस्थायी रोक
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 27 हजार करोड़ रुपये की लागत से पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बदलना था। हालांकि, उपभोक्ताओं से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाना था। अब तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही इस योजना के भविष्य पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।














