अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर सीधी बातचीत की कोशिशों ने रफ्तार पकड़ ली है। हालिया कूटनीतिक गतिविधियों ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच जंग खत्म करने को लेकर नए प्रयास शुरू हो सकते हैं। खासतौर पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की लगातार विदेश यात्राओं ने इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान अब अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार हो रहा है या यह सिर्फ रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।
कई देशों के दौरे पर अराघची, पाकिस्तान-ओमान बने केंद्र
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इन दिनों लगातार अंतरराष्ट्रीय दौरों पर हैं। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पहले पाकिस्तान का दौरा किया, इसके बाद ओमान पहुंचे और फिर वापस पाकिस्तान जाकर रूस जाने की योजना है। इन यात्राओं को आगामी वार्ता के दूसरे चरण से पहले रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
शनिवार को पाकिस्तान से रवाना हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल का एक हिस्सा तेहरान लौट गया है ताकि शीर्ष नेतृत्व से आगे के निर्देश लिए जा सकें, जबकि दूसरा हिस्सा अराघची के साथ ओमान पहुंचा है। इससे पहले खबर आई थी कि ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका ने भी अपने वार्ताकार की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी थी। इस फैसले की जानकारी डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ के जरिए दी थी। इसके बाद इस्लामाबाद में संभावित बातचीत पर विराम लग गया था, लेकिन अब नए घटनाक्रम ने एक बार फिर उम्मीद जगा दी है।
दूसरे दौर की वार्ता से पहले जमीन तैयार कर रहा ईरान
मौजूदा गतिविधियों से साफ है कि ईरान दूसरे दौर की बातचीत से पहले अपने कूटनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटा है। इसी क्रम में अराघची ओमान के मस्कट पहुंचे, जहां उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात की। ओमान लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इसके अलावा रूस भी इस संभावित शांति वार्ता में अहम भूमिका निभा सकता है, इसलिए अराघची का वहां जाना भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओमान में हुई अहम बैठक, युद्ध खत्म करने पर चर्चा
ओमान में हुई मुलाकात के दौरान युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने पर विस्तार से चर्चा की गई। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची ने राजनयिक प्रक्रियाओं का समर्थन करने में ओमान के जिम्मेदार रवैये की सराहना की और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध के संबंध में देश के समझदारी भरे रुख की प्रशंसा की।
वहीं, सुल्तान हैथम बिन तारिक ने युद्ध के जल्द और निर्णायक अंत की उम्मीद जताते हुए क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा की वापसी पर जोर दिया। इस बैठक में ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी भी शामिल रहे, जहां स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और पाकिस्तान की मध्यस्थता से जुड़ी बातचीत पर भी चर्चा हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन कूटनीतिक हलचलों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता वास्तव में खुलने वाला है या यह केवल दबाव और रणनीति का हिस्सा है।














