उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर मची रार अब खुलकर सड़क पर आ गई है। यहां पार्टी के ही एक पार्षद ने अपनी ही पार्टी के मेयर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे सियासत गरमा गई है। बीजेपी पार्षद ने एक वीडियो वायरल करते हुए नगर निगम में 400 करोड़ रुपये के भारी-भरकम भ्रष्टाचार का दावा किया है। उनका आरोप है कि निगम में खुली लूट मची है और मेयर विनोद अग्रवाल शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इन आरोपों के बाद मेयर ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार किया है, जिसके चलते यह जुबानी जंग अब चर्चा का विषय बन गई है।
‘चुप रहो, कुछ मत बोलो’- मेयर पर गंभीर आरोप
वार्ड-53 से बीजेपी पार्षद और नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य शिवप्रसाद शर्मा उर्फ विनोद शर्मा ने वायरल वीडियो में दावा किया कि निगम में ई-टेंडरिंग के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। उन्होंने कहा, “मुरादाबाद नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है. खुली लूटमार मची हुई है और कोई कुछ कहने वाला नहीं है, मैंने इस बारे में मेयर विनोद अग्रवाल से शिकायत की तो उन्होंने मुझे चुप रहने की हिदायत दी.” पार्षद का आरोप है कि मेयर ने उनसे कहा, “चुप रहो, कुछ मत बोलो.” उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में करीब 400 करोड़ रुपये के विकास कार्यों में सरकार को चूना लगाया गया है।
एक ही कंपनी और एक ही जेई का ‘खेल’
शिवप्रसाद शर्मा ने ‘निर्वाणा कंपनी’ और जेई किशनलाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कंपनी चाहे किसी भी वार्ड में काम करे, लेकिन इसके बिल हमेशा जेई किशनलाल ही बनाते हैं। पार्षद ने बताया कि रामलीला ग्राउंड और उनके वार्ड में टाइल्स उखाड़े बिना ही उसके ऊपर हॉटमिक्स सड़क बना दी गई और काम पूरा हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया। उन्होंने कहा, “पता नहीं किसका हाथ इस कंपनी के ऊपर है. आंखें बंद करके इस कंपनी के भुगतान कर दिए जाते हैं.”
ब्राह्मण होने की सजा और टेंडर में सेटिंग
भ्रष्टाचार के अलावा पार्षद ने भेदभाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी हुए 60 करोड़ के टेंडर लिस्ट से उनके वार्ड को गायब कर दिया गया है, जबकि सपा और कांग्रेस पार्षदों के वार्ड शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या ब्राह्मणों की वजह से मेयर इस वार्ड का विकास रोक रहे हैं या फिर इसलिए कि मैं ब्राह्मण हूं?” टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब टेंडर केवल 20-30 पैसे के अंतर पर छूट रहे हैं, जबकि पहले 30-35 प्रतिशत कम (ब्लो) पर छूटते थे। उन्होंने कहा, “मैं पार्षद नहीं पहरेदार हूं. इस मुद्दे को ऊपर तक ले जाऊंगा.”
मेयर ने आरोपों को बताया साजिश
इन गंभीर आरोपों पर मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पार्षद खुद कार्यकारिणी के सदस्य हैं और हाल ही में बजट उनकी मौजूदगी में पास हुआ था। मेयर ने कहा, “जब बहुत बढ़िया काम हो रहा होता है तो कुछ लोग असंतुष्ट होते ही हैं और साजिश के तहत वह आरोप लगाते हैं.” मेयर ने दावा किया कि पिछले दो साल में आरोप लगाने वाले पार्षद के वार्ड में 10-12 करोड़ के काम कराए गए हैं और उन्होंने खुद काम को संतोषजनक बताया था। मेयर ने कहा कि अगर कोई व्यक्तिगत नाराजगी है तो उस पर बात की जाएगी।













