राज्यसभा की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) को झटका देते हुए उसके कई सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है, जिससे सत्ता पक्ष का समीकरण तेजी से बदल गया है। शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दो अन्य सांसदों के साथ AAP छोड़ने का ऐलान किया।
उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी पार्टी से अलग हो गए। इसके साथ ही तीनों नेताओं ने बीजेपी में शामिल होने की घोषणा कर दी। इसे आम आदमी पार्टी में अब तक की सबसे बड़ी टूट माना जा रहा है।
बीजेपी का आंकड़ा 113 पहुंचा, 7 दलबदलू सांसद शामिल
ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्यसभा में बीजेपी के पास पहले 106 सदस्य थे, लेकिन AAP के 7 सांसदों के शामिल होने के बाद यह संख्या बढ़कर 113 हो गई है। राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के अलावा हरभजन सिंह, राजेन्द्र गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रम साहनी के बीजेपी में आने से पार्टी की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है।
यह बढ़त सिर्फ संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले विधायी कामकाज के लिहाज से भी इसे बेहद अहम माना जा रहा है।
सहयोगी दलों का भी मजबूत समर्थन
एनडीए (NDA) की ताकत केवल बीजेपी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके सहयोगी दल भी इस बढ़त को मजबूत बना रहे हैं। तमिलनाडु की AIADMK के 5 सदस्य, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 2, शिवसेना के 2 और रामदास अठावले की RPI के 1 सदस्य गठबंधन के साथ खड़े हैं।
इसके अलावा बिहार में नीतीश कुमार की JDU के 4 सदस्य, कर्नाटक में जेडीएस का 1 सदस्य, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव रखने वाली RLD का 1 सदस्य, असम की AGP का 1 और UPPL के 2 सदस्य भी NDA को समर्थन दे रहे हैं।
अजित पवार गुट और नामित सदस्य भी अहम कड़ी
महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजित पवार गुट के 4 सदस्य भी एनडीए के साथ हैं। इससे गठबंधन को और मजबूती मिली है।
राज्यसभा में 7 नामित सदस्य भी इस पूरे समीकरण में अहम भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर ये सदस्य कई महत्वपूर्ण विधेयकों के दौरान सरकार का समर्थन करते रहे हैं, जिससे सत्ता पक्ष को रणनीतिक बढ़त मिलती है।
क्यों अहम है 113 का आंकड़ा?
राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा हासिल करना हमेशा से एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। लोकसभा में मजबूत स्थिति के बावजूद, उच्च सदन में संख्या कम होने के कारण सरकार को कई बार विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ता था।
लेकिन अब बीजेपी का 113 तक पहुंचना यह संकेत देता है कि सरकार के लिए विधेयक पारित कराना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान हो सकता है। इससे आने वाले समय में सरकार के एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है।














