बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हो गया। लंबे समय से राज्य की राजनीति में स्थिरता और अनुभव का केंद्र रहे नीतीश कुमार ने गुरुवार (20 नवंबर 2025) को 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी शपथ ली, जिससे नई सरकार के भीतर शक्ति संतुलन और कार्य विभाजन का संदेश साफ दिखाई देता है।
NDA की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री ने संभाली कमान
हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने कुल 202 सीटें जीतकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह जीत न सिर्फ गठबंधन की मजबूती का प्रमाण है, बल्कि बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में नीतीश कुमार की लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता की पुष्टि करती है।
नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना बिहार के लिए एक नया राजनीतिक अध्याय है। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के साथ नई टीम से जनता को बेहतर प्रशासन, विकास कार्यों में तेजी और स्थिर सरकार की उम्मीद है।
पीएम मोदी समेत कई दिग्गजों ने की शिरकत
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद समारोह में शामिल हुए।
- उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री, एनडीए घटक दलों के प्रमुख, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता भी उपस्थित रहे।
यह शपथ ग्रहण समारोह एनडीए की एकता और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच भी साबित हुआ।
डिप्टी सीएम: संगठनात्मक संतुलन का संदेश
दो डिप्टी सीएम बनाए जाने के फैसले के पीछे कई राजनीतिक समीकरण हैं।
- सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था।
- विजय सिन्हा बीजेपी के मजबूत नेतृत्व में गिने जाते हैं।
इन दोनों को उपमुख्यमंत्री पद देकर एनडीए ने संगठनात्मक संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संदेश तीनों को साधने की कोशिश की है। इससे आने वाले दिनों में सरकार की कार्यप्रणाली में मजबूती की उम्मीद भी बढ़ गई है।
गांधी मैदान में शपथ ग्रहण के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जहां ड्रोन कैमरों से निगरानी, बैरिकेडिंग और वीआईपी मूवमेंट के लिए खास व्यवस्था की गई थी।














