लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक (Anti Paper Leak Amendment Bill) पारित होने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया और भाजपा सांसद लगातार उनके भाषण में व्यवधान डालते रहे। बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के बाद आखिरकार विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया।
बिल पास होने के बाद राहुल गांधी ने क्या कहा?
विधेयक पारित होने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा, “आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके जिम्मेदार का नाम लिया- गृह मंत्री अमित शाह. मुझे बीजेपी ने बोलने नहीं दिया. आज मैं वो सब कहूंगा जो सदन में कहने नहीं दिया गया. मेरा माइक बंद कर सकते हैं, लेकिन छात्रों की गूंज नहीं.”
लोकसभा में अमित शाह को लेकर लगाया गंभीर आरोप
इससे पहले लोकसभा में राहुल गांधी ने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाने का आदेश उन्होंने दिया था या नहीं। उनके इस आरोप के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और राहुल गांधी से माफी की मांग की। बढ़ते हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2:30 बजे तक और फिर तीन बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच ध्वनि मत से पास हुआ विधेयक
दोपहर तीन बजे जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस सांसद “एलओपी को बोलने दो” के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन करते रहे। शोर-शराबे के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद सदन ने ध्वनि मत से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। बिल पारित होने के बाद भी कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी जारी रही, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
पेपर लीक मामलों पर सरकार का जवाब
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 जुलाई को जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी।
उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में 152 बार पेपर लीक होने और 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने की बात कही गई थी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा किस आधार पर दिया गया, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 का कानून लागू होने के बाद पेपर लीक से जुड़े मामलों में अब तक 52 प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रतिबद्धता के तहत वर्ष 2020 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई, जिसे उन्होंने कांग्रेस के अधूरे कार्य को पूरा करने वाला कदम बताया।















