अगर आने वाले समय में आपके हाथ में ₹10 या ₹20 का प्लास्टिक करेंसी नोट आए तो हैरान होने की जरूरत नहीं होगी। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ₹10 और ₹20 के Polymer Currency Notes का फील्ड ट्रायल शुरू किया जाएगा। ट्रायल के दौरान ये नए नोट मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही प्रचलन में रहेंगे।
दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से ही प्लास्टिक करेंसी का इस्तेमाल हो रहा है, जबकि भारत में यह योजना पिछले करीब 15 वर्षों से विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ पाई थी।
2009 में शुरू हुआ था प्लास्टिक नोटों का प्लान
RBI ने पहली बार वर्ष 2009 में प्लास्टिक नोट जारी करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने इसके ट्रायल को मंजूरी दी थी। उस समय करीब 100 करोड़ ₹10 के प्लास्टिक नोट छापने की योजना बनाई गई थी।
इन नोटों का परीक्षण मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर जैसे अलग-अलग मौसम वाले शहरों में किया गया था, ताकि विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में इनके प्रदर्शन का आकलन किया जा सके।
मशीनों में आई सबसे बड़ी तकनीकी दिक्कत
ट्रायल के दौरान सबसे बड़ी चुनौती बैंकिंग मशीनों में सामने आई। RBI की जांच में पाया गया कि हाई-स्पीड नोट गिनने वाली मशीनों में स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी के कारण प्लास्टिक नोट आपस में चिपक जाते थे। इससे नोटों की गिनती और प्रोसेसिंग में बार-बार समस्या आने लगी, जिसके कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
महंगे हैं, लेकिन ज्यादा टिकाऊ भी
सरकार द्वारा कराए गए अध्ययन में यह भी सामने आया कि प्लास्टिक नोटों की शुरुआती निर्माण लागत कागज के नोटों की तुलना में अधिक होती है, लेकिन इनकी उम्र काफी लंबी होती है। ये जल्दी फटते या खराब नहीं होते, जिससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है।
इससे लंबे समय में लागत कम हो सकती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
नोटबंदी और आयात पर निर्भरता बनी देरी की वजह
रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक नोट बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल विदेशों से आयात करना पड़ता था। इसके अलावा बैंकों को अपनी नोट गिनने वाली मशीनों और अन्य सिस्टम में भी बदलाव करना पड़ता, जिसके लिए बड़े निवेश की आवश्यकता थी।
इसी बीच वर्ष 2016 की नोटबंदी के बाद RBI का पूरा फोकस नई करेंसी छापने पर चला गया, जिससे प्लास्टिक नोटों की योजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में चली गई।
सफल ट्रायल के बाद मिल सकते हैं नए Polymer Notes
अब केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद एक बार फिर इस परियोजना पर काम शुरू होगा। माना जा रहा है कि नए Polymer Currency Notes में होलोग्राम, ट्रांसपेरेंट विंडो और अन्य आधुनिक सुरक्षा फीचर्स दिए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना और भी मुश्किल होगा।
यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में भारत में भी अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक करेंसी नोटों का व्यापक इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है।












