संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार (1 दिसंबर 2025) से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र से ठीक पहले, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है, जिससे राजनीति गरमा गई है।
संसद में विपक्ष 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चीन के मुद्दे और लाल किला के पास ब्लास्ट जैसे मुद्दों पर केंद्र को घेरने की तैयारी में है, लेकिन इस एफआईआर के बाद कांग्रेस पर अतिरिक्त दबाव आ गया है।
राहुल और सोनिया गांधी पर क्या है आरोप?
यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को धोखाधड़ी से हासिल करने के आरोपों पर आधारित है, जिसकी संपत्ति लगभग 2,000 करोड़ रुपये की थी।
- आरोप: नेताओं और उनके सहयोगियों ने मिलकर उस कंपनी का गलत तरीके से नियंत्रण हासिल किया, जो पहले कांग्रेस से जुड़ी थी।
- अधिग्रहण का तरीका: 3 अक्टूबर को दर्ज एफआईआर के अनुसार, यह अधिग्रहण यंग इंडियन के जरिए किया गया, जिसमें राहुल और सोनिया गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है।
- कानूनी आधार: एफआईआर ईडी (ED) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66 (2) के तहत EOW को भेजे गए पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
कांग्रेस ने केस पर जताई नाराजगी
यह मामला बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2014 की शिकायत से संबंधित है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
- कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “न तो नई शराब है, न नई बोतल और न ही नया गिलास। यह एक ऐसा अनोखा मामला है जहां न तो कोई पैसा इधर-उधर हुआ, न ही कोई अचल संपत्ति हस्तांतरित हुई, फिर भी धन शोधन का मामला खोज लिया गया।”
- उन्होंने आरोप लगाया कि “जब भी पार्टी कोई मुद्दा उठाना चाहती है तो ऐसे पुराने मामले फिर से उछाल दिए जाते हैं।”
संसद में विपक्ष देगा साथ या अलग-थलग पड़ेगी कांग्रेस?
शीतकालीन सत्र से ठीक पहले शीर्ष नेताओं पर एफआईआर दर्ज होने से कांग्रेस पर प्रभाव पड़ सकता है।
- कोर्ट का फैसला: हेराल्ड मामले में कोर्ट 16 दिसंबर 2025 को अपना फैसला सुनाएगी। अगर फैसला कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ आता है तो यह पार्टी के लिए संघर्ष को और कमजोर कर देगा।
- इंडिया गठबंधन का साथ: कांग्रेस इस समय INDIA गठबंधन के अपने सहयोगियों (जैसे डीएमके, टीएमसी, आरजेडी) की जरूरत महसूस करेगी, ताकि वह एसआईआर जैसे मुद्दों से ध्यान न भटकाए। सवाल यह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अन्य विपक्षी दल संसद में गांधी परिवार का खुलकर समर्थन करेंगे या नहीं।














