TIME100 Climate Leaders 2025: लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद और जलवायु इनोवेटर सोनम वांगचुक को TIME मैगजीन ने 2025 की TIME100 क्लाइमेट लीडर्स सूची में शामिल किया है। वांगचुक को यह सम्मान ‘Defenders’ श्रेणी में मिला है, जो उन लोगों को सम्मानित करती है जो धरती के सबसे संवेदनशील इकोसिस्टम और समुदायों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हिरासत में रहते हुए मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
57 वर्षीय वांगचुक इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में हैं। उन्हें यह सम्मान 35 दिन की भूख हड़ताल और लद्दाख में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान हुई गिरफ्तारी के बीच मिला है। TIME की इस सूची में दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों, कार्यकर्ताओं, उद्यमियों और नेताओं को शामिल किया गया है जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वास्तविक कदम उठा रहे हैं।
24 सितंबर को हिंसक हुआ था आंदोलन
वांगचुक का आंदोलन लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और हिमालयी इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर शुरू हुआ था। हालांकि, 24 सितंबर 2025 को लेह में यह प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। इसके बाद वांगचुक को हिरासत में लिया गया।
‘आइस स्तूप’ से दुनिया में कायम की पहचान
TIME मैगजीन ने वांगचुक के ‘आइस स्तूप’ इनोवेशन की सराहना की है — यह एक कृत्रिम ग्लेशियर है जो ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है। यह तकनीक सर्दियों में पिघले हुए पानी को जमा करती है और गर्मियों में उसे सिंचाई के लिए छोड़ती है। इस नवाचार को नेपाल, पाकिस्तान, चिली और स्विट्जरलैंड में भी अपनाया गया है।
“जमे हुए रेगिस्तानों को उपजाऊ भूमि में बदला”
TIME की रिपोर्ट में कहा गया कि वांगचुक के विचारों ने “जमे हुए रेगिस्तानों को उपजाऊ भूमि में बदल दिया” और उन्हें “हिमालय और वहां के लोगों का रक्षक” बताया गया। वांगचुक की यह पहल जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे हिमालयी क्षेत्र के लिए उम्मीद की किरण मानी जा रही है।
पत्नी ने सरकार पर साधा निशाना
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो, जो हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की प्रमुख हैं, ने सोशल मीडिया पर TIME की घोषणा साझा करते हुए इसे “गहरी विडंबना” बताया।
उन्होंने एक्स (X) पर लिखा, “जबकि सरकार सोनम वांगचुक को देशद्रोही बता रही है, TIME मैगज़ीन उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली जलवायु नेताओं में से एक मानती है।”
आलोचकों ने उठाए सवाल
वांगचुक की इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बाद भारत में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यह सम्मान दर्शाता है कि दुनिया जिस व्यक्ति को ‘पर्यावरण का रक्षक’ मान रही है, वही अपने देश में हिरासत में है।













