दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका में मांग की गई है कि बड़े स्तर के धरना-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की बजाय कोई अधिक उपयुक्त और सुविधाजनक स्थान निर्धारित किया जाए।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से केंद्र सरकार का पक्ष रखने और आवश्यक निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा।
याचिका में उठाए गए कई व्यावहारिक मुद्दे
याचिकाकर्ता सतीश चंद कौशिक का कहना है कि जंतर-मंतर बड़े पैमाने पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है। याचिका में दावा किया गया है कि वहां पीने के पानी, शौचालय, सीवरेज और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में यातायात गंभीर रूप से प्रभावित होता है। इससे स्थानीय निवासियों, राहगीरों और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही में भी बाधा उत्पन्न होती है।
सरकार से मांगा स्पष्ट रुख
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या विरोध प्रदर्शनों के लिए कोई वैकल्पिक या अधिक उपयुक्त स्थान तय किया जा सकता है। अदालत चाहती है कि सरकार इस संबंध में अपना स्पष्ट रुख पेश करे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट अपने कई पूर्व फैसलों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को नागरिकों का मौलिक अधिकार बता चुका है। हालांकि, अदालत यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि ऐसे प्रदर्शनों के दौरान आम लोगों की सुरक्षा, सुविधा और सार्वजनिक व्यवस्था का भी समान रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।















