Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से सवाल किया है कि राज्य के पुलिस थानों के पूछताछ कक्षों (Interrogation Rooms) में अब तक सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए हैं। अदालत ने कहा कि थाने का पूछताछ कक्ष वह प्रमुख स्थान होता है, जहां कैमरे जरूर होने चाहिए ताकि मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं पर रोक लग सके।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उठाया था, जिसमें बताया गया था कि राजस्थान में आठ महीनों में पुलिस हिरासत के दौरान 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 7 मौतें उदयपुर संभाग में हुईं थीं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मंगलवार (14 अक्टूबर 2025) को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,
“पूछताछ कक्ष थाने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां कैमरे जरूर होने चाहिए। आपके हलफनामे के अनुसार वहां कोई कैमरा नहीं है, यह गंभीर चिंता का विषय है।”
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि सीसीटीवी लगाने में भले ही खर्चा आता हो, लेकिन यह मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
निगरानी तंत्र पर भी उठे सवाल
कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा कि राज्य में निगरानी तंत्र (Monitoring System) कैसे लागू किया जाएगा। साथ ही यह सुझाव भी दिया कि क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी को निगरानी की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
2018 के आदेश की याद दिलाई
बेंच ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी राज्यों को आदेश दिया था कि पुलिस थानों और हिरासत केंद्रों में CCTV कैमरे लगाए जाएं, ताकि हिरासत में अत्याचार या मानवाधिकार हनन की घटनाओं को रोका जा सके।
न्याय मित्र की दलीलें
इस सुनवाई में अदालत द्वारा नियुक्त न्याय मित्र (Amicus Curiae) सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने बताया कि उन्होंने इस मामले में अपडेटेड रिपोर्ट दाखिल कर दी है। उन्होंने कहा कि एक प्रभावी निगरानी तंत्र की व्यवस्था जरूरी है ताकि पुलिस थानों और जांच एजेंसियों में पारदर्शिता बनी रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य राज्यों से भी इस रिपोर्ट पर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख 24 नवंबर तय की है।














