संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार, सत्ता पक्ष और विपक्ष को लेकर अहम संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए अपील की कि संसद में हंगामे की राजनीति से बचते हुए महंगाई, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जाए।
मायावती ने कहा कि संसद का समय जनता की समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल होना चाहिए और राजनीतिक टकराव के बजाय देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण चुनौतियों पर सार्थक बहस होनी चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भी उठाई चर्चा की मांग
बसपा प्रमुख ने राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर लोगों में नाराजगी है और जनता उन लोगों से जवाब चाहती है जो राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र में प्रमुखता से उठ सकता है।
महिला सुरक्षा, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर जताई चिंता
मायावती ने अपने बयान में देश के विभिन्न राज्यों में महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पश्चिम बंगाल, राजस्थान समेत कई राज्यों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं, पेपर लीक, चुनावी रेवड़ियों में कथित गड़बड़ियों, भ्रष्टाचार और कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों को भी संसद में उठाने की आवश्यकता बताई।
इसके अलावा उन्होंने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव, भारतीय रुपये की गिरती कीमत और उसके देश की अर्थव्यवस्था एवं आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख किया।
सत्ता और विपक्ष से सहयोग की अपील
बसपा सुप्रीमो ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से राजनीतिक मतभेदों को अलग रखते हुए संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सभी दलों को मिलकर जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में काम करना चाहिए।
संसद की कार्यवाही को लेकर पहले भी उठा चुकी हैं सवाल
मायावती इससे पहले भी कई बार संसद की कार्यवाही के दौरान होने वाले हंगामे और व्यवधान पर सवाल उठा चुकी हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और विपक्ष भी इस मुद्दे को मानसून सत्र में उठाने की तैयारी कर रहा है।















