राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों का उत्थान करना है, न कि इसे स्थायी व्यवस्था के रूप में जारी रखना। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करने की अपील की।
सामाजिक भेदभाव खत्म होने तक जारी रहेगा आरक्षण
गुरुवार (6 अगस्त) को आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में असमानता और भेदभाव मौजूद रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।
भागवत ने यह भी कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का पर्याप्त लाभ मिल चुका है, उन्हें इस पर विचार करना चाहिए कि आगे के अवसर दूसरे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचें, ताकि अधिक से अधिक वंचित वर्ग इसका लाभ उठा सकें।
Gen Z और Gen Alpha से संवाद में रखी अपनी बात
‘इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘Gen Z’ और ‘Gen Alpha’ के साथ बातचीत करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बनाई गई सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) की नीति का मूल उद्देश्य समाज में एकता स्थापित करना था, न कि विभाजन पैदा करना।
आरक्षण से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘इसे (आरक्षण को) राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया और इससे कड़वाहट पैदा हुई. असल में, इसे सामाजिक एकता के लिए लाया गया था. जानबूझकर गलत मंशा रखने वालों ने इस कदम के मकसद को गलत तरीके से पेश किया. जब तक इसे ठीक नहीं किया जाता, मुझे कोई समाधान नहीं दिखता.’’
‘डॉ. अंबेडकर की भावना के अनुसार लागू हो आरक्षण’
मोहन भागवत ने कहा, ‘‘अगर हम ईमानदारी से डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की सलाह का पालन करें, तो कोई समस्या नहीं है. आरक्षण सामाजिक भेदभाव के कारण शुरू किया गया था. जब तक सामाजिक भेदभाव बना रहेगा, आरक्षण भी रहेगा.’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘आरक्षण का लाभ उठाने वालों में से ही कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त लाभ मिल चुका है और अब समय आ गया है कि ये लाभ दूसरों तक भी पहुंचाए जाएं. उप-वर्गीकरण की मांग हो रही है और शीर्ष अदालत ने भी ऐसा ही कहा है. आरक्षण का मकसद लोगों का उत्थान करना है, न कि इसे हमेशा के लिए बनाए रखना. ऐसी सोच को बढ़ावा दें और राजनीति को इससे दूर रखें. अगर सभी उपायों को ईमानदारी से लागू किया जाए, तो आरक्षण की ज़रूरत कम समय में ही खत्म हो जाएगी. तब हम इस पर विचार करेंगे.’’















