पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ईंधन की बिक्री और खरीद को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। नए आदेश के तहत बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों से सीधे ईंधन खरीदना प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही एक ग्राहक को प्रतिदिन 200 लीटर से अधिक डीजल देने पर भी रोक लगा दी गई है।
बड़े खरीदार अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ईंधन
सरकार के नए निर्देशों के अनुसार फैक्ट्रियां, औद्योगिक इकाइयां, संस्थान और बड़े कमर्शियल उपभोक्ता अब अपनी जरूरत का पेट्रोल या डीजल सामान्य पेट्रोल पंपों से नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें ईंधन की आपूर्ति केवल अपने अधिकृत कंज्यूमर पंपों के माध्यम से करनी होगी।
इस फैसले का उद्देश्य रिटेल उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और बड़े पैमाने पर होने वाली खरीद पर नियंत्रण करना है।
पेट्रोल पंपों के लिए भी जारी हुए सख्त निर्देश
नए नियमों के तहत पेट्रोल पंप संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि डीजल केवल वाहन की टंकी या PESO से स्वीकृत कंटेनर में ही दिया जाएगा। किसी भी वाहन या ग्राहक को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जा सकेगा।
इसके अलावा खरीदा गया डीजल आगे बेचने की अनुमति भी नहीं होगी। नियमों के पालन की जिम्मेदारी तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप डीलरों को सौंपी गई है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार के अनुसार इस निर्णय के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं, जिनकी वजह से पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई चेन, शिपिंग और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे हालात में उपलब्ध ईंधन का संतुलित और नियंत्रित उपयोग जरूरी माना गया है।
दूसरा कारण देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की असामान्य मांग में वृद्धि है। सरकार के संज्ञान में आया कि थोक और खुदरा कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर कुछ औद्योगिक और व्यावसायिक ग्राहक बड़ी मात्रा में पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे थे। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा था और कुछ क्षेत्रों में कमी की आशंका पैदा हो रही थी।
कितने समय तक लागू रहेंगे ये नियम?
सरकारी आदेश के मुताबिक यह प्रतिबंध फिलहाल अस्थायी है। जारी किए गए निर्देश अधिकतम 90 दिनों तक प्रभावी रहेंगे। हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार इनकी अवधि बढ़ा सकती है।
सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह विशेष परिस्थितियों में किसी क्षेत्र, ग्राहक या विशेष लेनदेन को इन नियमों से छूट प्रदान कर सके।
नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। निगरानी और जांच के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के राजपत्रित अधिकारियों, डीएसपी या उससे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और तेल कंपनियों के अधिकृत अधिकारियों को तलाशी और जब्ती की शक्तियां दी गई हैं।
राज्य सरकारों को जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के अवैध डायवर्जन पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कार, बाइक या अन्य निजी वाहनों में ईंधन भरवाने वाले लोगों पर इस आदेश का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। 200 लीटर की दैनिक सीमा सामान्य वाहन मालिकों के लिए व्यावहारिक रूप से अप्रासंगिक है क्योंकि अधिकांश वाहनों की टंकी क्षमता इससे काफी कम होती है।
सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य बड़े खरीदारों द्वारा की जा रही भारी खरीद पर रोक लगाना और आम लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।















