बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 83 सीटों पर बढ़त बनाकर शानदार प्रदर्शन किया है। JDU की इस बड़ी सफलता के बाद, चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उन पर राजनीति छोड़ने का दबाव बना दिया है।
क्या राजनीति छोड़ देंगे प्रशांत किशोर?
वायरल हो रहे बयान में प्रशांत किशोर ने जुलाई 2025 में एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में यह दावा किया था कि “तीर सिंबल (JDU का चुनाव चिन्ह) को 25 से ज्यादा सीटें आई तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।”
इसी बयान के संदर्भ में जब उनसे एक और साक्षात्कार में सवाल किया गया था, तो प्रशांत किशोर ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा था: “बिल्कुल कहा है भाई लोग जबरदस्ती अपना कि भाई क्या कीजिएगा। मैंने लिखा है कि भाई नहीं होगा। छोड़ देंगे राजनीति अगर इतनी भी हमको नहीं समझ है तो।” अब JDU ने 25 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे किशोर के इस बयान पर सबकी नजरें टिकी हैं।
जन सुराज का प्रदर्शन निराशाजनक
इस चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पार्टी ने 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 5 ने चुनाव नहीं लड़ा। बचे हुए 238 प्रत्याशियों में से:
- 116 प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे।
- 122 प्रत्याशी तीसरे स्थान से भी नीचे रहे।
14 नवंबर शाम 6:30 बजे तक की जानकारी के अनुसार, जन सुराज को लगभग 15 लाख वोट मिले, जो लगभग 3% वोट शेयर के बराबर है। हालांकि, पार्टी 32 निर्वाचन क्षेत्रों में 10,000 से ज़्यादा वोट हासिल करने में कामयाब रही।
विपक्षी और NDA उम्मीदवारों पर पड़ा ‘जन सुराज’ वोटों का असर
जन सुराज के वोटों की मौजूदगी ने कई सीटों पर नतीजों को प्रभावित किया:
- राजद की हार: जन सुराज के कारण राजद उम्मीदवार सुशील कुमार (चेरिया बरियारपुर) और प्रमोद वर्मा (शेरघाटी) हार गए, जबकि क्रमशः JDU और LJP के उम्मीदवार जीते।
- NDA की हार: NDA उम्मीदवार मंज़र आलम (जोकीहाट, JDU) AIMIM से हार गए, और उमाकांत सिंह (चनपटिया, BJP) कांग्रेस से पीछे चल रहे हैं, इन दोनों सीटों पर भी जन सुराज के वोटों का असर देखा गया है।














